उत्तराखंड सुरंग ढहने से लखीमपुर खीरी मजदूर | सिल्क्यारा सुरंग | 13 दिन हो गए, मेरे बेटे को छोड़ दिया गया

उत्तरकाशी2 मिनट पहलेलेखक: वैभव पलनीटकर

  • कॉपी लिंक
तस्वीर टनल में मजदूर मजदूर मनजीत के पिता की है।  उन्होंने कहा कि मैं एक बेटे के रूप में जाना जाता हूं, मैं दूसरा नहीं खोना चाहता हूं।  चौधरी का बेटा टनल में फंसा है - दैनिक भास्कर

तस्वीर टनल में मजदूर मजदूर मनजीत के पिता की है। उन्होंने कहा कि मैं एक बेटे के रूप में जाना जाता हूं, मैं दूसरा नहीं खोना चाहता हूं। चौधरी का बेटा टनल में फंसा हुआ है

50 साल के चौधरी छोटूराम खेडड़ी के रहने वाले हैं। जिस काम की मार्केटप्लेस है, वो कर लेते हैं। कोई तैशुदा नौकरी नहीं है। परिवार में पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा है। पहले दो बेटे थे, बड़ा बेटा दीपू मुंबई में ब्रिज ब्रिज साइट पर बना था। वहां पिछले साल एक हादसा हुआ और उनकी मौत हो गई।

चौधरी के छोटे बेटे मनजीत की अभी जिंदगी और मौत के बीच वही टालन में फंस गई है, जहां उनके अलावा 40 और किताबों की जिंदगी अटकी हुई है। चौधरी को जैसे ही खबर मिली कि उनका बेटा टनल में फंस गया है। वह भागते-दौड़ते उत्तरकाशी चाल आ गया।

पिछले 13 दिनों से चौधरी सुबह से शाम तक रोज टनल का मुहाना देखते थे, लेकिन देर शाम फिर लौट जाते हैं, उम्मीद है कि अगले सूरज के साथ उनका बेटा मनजीत भी बाहर निकलेगा।

पिछले 30 घंटे से प्रस्थान का काम रुका हुआ है।  अभी 15 मीटर की खुदाई बाकी है।

पिछले 30 घंटे से प्रस्थान का काम रुका हुआ है। अभी 15 मीटर की खुदाई बाकी है।

बोले- अब चौधरी का सब्र टूट रहा है
आज सुबह मनजीत से हेडफोन लगाकर मेरी बात हो गयी। मैंने पूछा- बेटा कैसे हो, बोला- हम ठीक हैं, अभी सोकर उठे हैं, थोड़ी देर में खाना खाएंगे, जो पाइप से आया है। जो लोग अंदर हैं वे आपस में बातचीत कर रहे हैं, ऐसे ही समय-समय पर बातचीत कर रहे हैं।

वो बोला- ‘जल्दी कोशिश करके निकाल लो’ मैंने कहा- ‘कटाई चल रही है, रास्ते में कुछ लोहा आ गया था।’ उधर से जवाब आया कि- ‘हम लोग यहां से कोई खुदाई नहीं कर रहे हैं।’ किसी भी शिकारी को नहीं बताया गया है।’

चौधरी की ओर से भरी आवाज में कहा गया है, ‘मैं एक बेटा हूं, जो तीन तलाक में खो गया हूं, दूसरा बेटा नहीं खोना चाहता।’ मेरा सब्र टूट रहा है, सुबह निकलेगा, शाम को निकलेगा, बस थोड़ी देर, अब तक। ये सभी हैरान हैरान हो रहे हैं। आज 13 दिन पूरे हो गए हैं।’

गब्बर ने कहा था- टनल का काम जोखिम भरा है
कोटद्वार में रहने वाले जयमल सिंह नेगी के भाई गब्बर सिंह नेगी टनल में फोरमैन का काम करते हैं। गब्बर भी टनल में फंस गया है। गब्बर अपने भाई के टनल हादसे में फंसने की खबर सुनाते हुए उत्तरकाशी टनल साइट पर चला आया।

जयमल अपने भाई गब्बर के बारे में बातें करते हुए भावुक हो जाते हैं, कहते हैं- ‘गब्बर ने मुझसे कई बार कहा था कि काम जोखिम भरा है, लेकिन कौन जोखिम नहीं देता। मुझे विश्वास है कि गब्बर रेस्ट 40 शिलालेखों में मदद और दस्तावेजों की चिंता पहले शामिल है। वो सबसे आखिरी में आ रहा है।’

टनल में 41 एम्बुलेंस मशीनों के लिए अस्पताल ले जाने के लिए आउट ऑफ स्ट्रेच के बाद अस्पताल ले जाया गया।

टनल में 41 एम्बुलेंस मशीनों के लिए अस्पताल ले जाने के लिए आउट ऑफ स्ट्रेच के बाद अस्पताल ले जाया गया।

अवतरण ऑपरेशन में कहाँ आ रही समस्या?
टनल में पुनर्स्थापना ऑपरेशन में सिलकियारा साइड वाले मुहाने से हॉरिजॉन्टल इंस्टॉलेशन करके पाइप लाइनकर पैसेज बनाया जा रहा है। ये डिजाइनिंग अमेरिकन ऑर्गर मशीन की जा रही है। लोहे के पाइप के इस पैसेज के माध्यम से ही मूर्ति को प्रतिष्ठित किया गया।

टनल में मूर्ति और बाहरी मुहाने के बीच करीब 60 मीटर का मलबा फाँक हुआ है, इसी तरह के टुकड़े के बीच से इंस्टॉलेशन की जा रही है। ये कीमत 46.8 मीटर तक हो चुकी है, लेकिन अभी 14-15 मीटर कीमत बाकी है।

23 नवंबर को दिन में कास्टिंग के दौरान रास्ते में कोई धातु का शव बरामद किया गया, जिस पर ऑर्गर मशीन के ब्लेड बुरी तरह से खराब हो गए और ऑर्गर मशीन के मंच पर राख हो गई, वो कॉन्टेस्ट का मंच भी टूट गया। इसके बाद डेस्टिनेशन बंद हो गया।

मेटल बॉडी आई के रास्ते में उसे हटाने के लिए मैन्युअल दीक्षांत समारोह और सहपाठी का सहारा लिया गया। उत्तराखंड सरकार के ओएसडी, ओएसडी के पूर्व सलाहकार भास्कर खुल्बे ने अपनी बातचीत में बताया था कि जिस कटर से मेटल कटर की कोशिश की गई थी, वह कैटल की गैस का धुआं तक पहुंच रहा है, इसके बाद हमने इसे बंद कर दिया।

लेकिन जांच में बात ये है कि अगर उन तक घुअन पहुंच रहा है तो इसका मतलब है कि हम लक्ष्य के बेहद करीब हैं।

शुक्रवार को दोपहर में कार्टूनिस्ट को बोल्ट में खाना भेजा गया।

शुक्रवार को दोपहर में कार्टूनिस्ट को बोल्ट में खाना भेजा गया।

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के पूर्व सलाहकार और उत्तराखंड सरकार में मेटडी भास्कर के उद्घाटन समारोह में गुरुवार को कहा गया था कि हम 12-14 घंटे में वफादारी तक पहुंचेंगे। फिर उन्हें एनडीआरएफ की सहायता से 2 से 3 घंटे तक बाहर ले जाया गया।

अवलोकन के लिए अभी 15 घंटे का और घटिया वक्ता, 18 मीटर की पेशकश बाकी
पिछले कम से कम 30 घंटे से उड़ान बंद है। कास्टिंग होने के बाद भी अगर आगे सब कुछ ठीक रहता है तो कास्टिंग और रेटिंग 16 घंटे की होती है। खुलबे ने भास्कर से बातचीत में कहा- ‘नए लीडरशिप पाइप्स की रीअसेंबलिंग की जा रही है।’ 6 मीटर के पाइप को एसेंब्लिंग, नारायण और पुशिंग करने में 4 घंटे का समय लगा। हमारा अनुमान है कि हम तक 60 मीटर की खुदाई की है, जिसमें 18 मीटर की खुदाई की गई है।

खुलेबे कहते हैं कि ‘6 मीटर का एक पाइप है, मतलब 3 पाइप डाले जाने हैं। 1 पाइप में 4 घंटे के हिसाब से कुल 12-14 घंटे का समय शुरू होने में देरी हो सकती है।’

उत्तरकाशी की मस्जिद्यारा टनल में एनडीआरएफ ने मॉक अरेस्ट की कार्रवाई की।  इसमें वो कलाकार की, जिसमें भीतर विचित्र आकृतियों को बाहर लाया जाएगा।

उत्तरकाशी की मस्जिद्यारा टनल में एनडीआरएफ ने मॉक अरेस्ट की कार्रवाई की। इसमें वो कलाकार की, जिसमें भीतर विचित्र आकृतियों को बाहर लाया जाएगा।

इतना स्लो क्यों है गेस्ट, 13 दिन में क्या हुआ?
12 नवंबर: सुबह करीब साढ़े पांच बजे ब्रम्हाखाल यमुनोत्री हाईवे पर स्थित इंजिनियर टनल के सिलक्यारा चोर के पास मालबा डीले की खबर आई, मालबा डीले से अंदर काम कर रहे 41 मजदूर फंस गए। सुबह करीब 9 बजे लाइट ऑपरेशन शुरू हुआ। बचाव कार्य के तहत सबसे पहले कोशिश की गई कि टालन में 55 मीटर लंबाई में मौजूद हिस्से को हेवी-भार्कम एक्सकेवेस्टर मशीन से कुरेदकर आउट आउट किया जाए, लेकिन ऐसा करने पर और ज्यादा मलबा लगा दिया गया और ऑपरेशन में कोई सफलता नहीं मिली।

13 नवंबर: एक्सकेवेस्टर से खुदाई करते समय करीब 20 मीटर तक की खाई खोदी गई, लेकिन फिर मलबा से ऊपर गिरा और 14 मीटर तक की खुदाई की गई, मतलब 6 मीटर तक की खाली जगह, फिर से मालबा भर में। इसके बाद मूर्ति की नई योजना तैयार की गई, जिसमें लोकल ऑगर मशीन और मुख्य कंपनी के पाइपों की पेशकश करने की योजना बनाई गई, ताकि अंदर जुड़े हुए टुकड़ों को सुरक्षित रूप से बाहर निकाला जा सके।

14 नवंबर: सुबह ऑगर मशीन और इंस्टॉलेशन पाइप टनल साइट पर पहुंच गए। लेकिन ऑगर मशीन से मलबे के अंदर की खुदाई रात 10 बजे तक शुरू हो पाई। लेकिन इसके बाद प्रेस विज्ञप्ति में कोई सफलता नहीं दिख रही थी, मालबा गिरना लगातार जारी थी। इसके बाद रिटायरमेंटर्स ने निर्णय लिया कि अमेरिकी स्टेट ऑफ आर्ट ऑगर स्टार्टअप मशीन के लिए डिजाइन तैयार किया जाएगा।

15 नवंबर: दिन की शुरुआत ही अमेरिकी ऑगर मशीन के कलपुर्जे टनल साइट पर शुरू हो गई। सुबह सुबह टनल के इनसाइड इंस्टॉलेशन साइट तक इस मशीन को असेंबल करने का काम किया गया। दिन में टालन में कामगार मजदूरों के समूह ने टनल कंसट्रक्शन कंपनी के खिलाफ प्रदर्शन और कंसल्टेंसी की मांग की।

16 नवंबर: सुबह करीब 10 बजे अमेरिकी ऑगर मशीन से चिप्स की बीच-बीच की शुरुआत हो रही है। शाम 4 बजे तक ये मशीन सिर्फ 9 मीटर तक ही स्थापित कर पाई। इस बात को लेकर चिंता जताई जा रही है कि इस मशीन से भी प्रोडक्शन काफी स्लो हो रही थी।

शुक्रवार को डिजाइनिंग का काम शुरू हुआ तो ऑगर मशीन के रास्ते में स्टील के पाइप आ गए, जिससे पाइप मुड़ गया।  स्टील के पाइप और टनल में डाले जा रहे पाइपों के हिस्सों को बाहर निकाल दिया गया है

शुक्रवार को डिजाइनिंग का काम शुरू हुआ तो ऑगर मशीन के रास्ते में स्टील के पाइप आ गए, जिससे पाइप मुड़ गया। स्टील के पाइप और टनल में डाले जा रहे पाइपों के हिस्सों को बाहर निकाल दिया गया है

17 नवंबर: सुबह 9 बजे तक मशीन ने करीब 20 मीटर तक की स्थापना की। 22 मीटर तक की कास्टिंग के बाद एक बड़ी चट्टान की मशीन बंद हो गई। दोपहर करीब 3 बजे एक आर्किटेक्चरल क्रैकिंग साउंड आया, इसके बाद प्रतिष्ठा का काम रोक दिया गया। बहस करने वालों का कहना था कि अगर कास्टिंग जारी रहती है तो मलबा डेल का खतरा है।

18 नवंबर: 24 घंटे तक अमेरिकी ऑगर मशीन से लॉन्चिंग का काम बंद रहा। 18 बजे सुबह 10 बजे ये शुरू हो गया। ट्रस्टर्स ने डिफाइन के लिए दूसरे प्लैनल पर काम शुरू कर दिया है और इसके तहत आदि डिजायन के साथ-साथ डुबाने के विकल्प पर चर्चा हुई है। राज्य और केंद्र के शीर्ष अधिकारियों की साइट पर विजिट में बढ़ोतरी हुई है।

19 नवंबर: कोशिशें कुछ सफल हो रही थीं, लेकिन अब भी तेजी से ऑफरिंग नहीं हो पा रही थी, लोकप्रियता का दूसरा हफ्ता शुरू हो गया था। 5 शोबदोशों को कार्यक्रम में शामिल किया गया। ओएनजीसी, सतलुज जलविद्युत निगम, रेल विकास निगम लिमिटेड, नेशनल इंजीलज एंड आर्किटेक्चर कॉर्पोरेशन लिमिटेड, सचिवालय इलेक्ट्रोड कॉर्पोरेशन लिमिटेड को अपनी-अपनी जिम्मेदारियां सौंपी गईं।

20 नवंबर: 6 इंच का एक पाइप की कोशिशें 18 नवंबर से ही शुरू की गईं। 20 नवंबर को शाम करीब साढ़े चार बजे तक इसी तरह पाइप से लेकर रोटी, सब्जी, दाल-चावल जैसी खाद्य सामग्री पहुंचाई गई।

21 नवंबर: सुबह करीब 4 बजे एक एंडोस्कोपिक कैमरा 6 इंच वाले पाइप के माध्यम से डाला गया और अंदर 41 मूर्ति के फोटो और वीडियो के लिए दिया गया। उदाहरण के लिए देखें देश ने राहत की सांस ली।

22 नवंबर: सुबह अमेरिकी ऑर्गर मशीन की स्थापना फिर से शुरू हुई। सुबह 11 बजे अधिकारियों ने बताया कि 39 मीटर खुदाई हुई है। दोपहर 2 बजे से 42 मीटर तक खुदाई होने का अपडेट मिला। शाम होते-होते कुल 45 मीटर तक की रेटिंग हो गई थी। लेकिन इसके बाद मेटल ग्राइडर ऑगर मशीन का रास्ता बंद कर दिया गया, इसके बाद फिर से इसे बंद कर दिया गया।

23 नवंबर: दिल्ली से आए तकनीशियन ने मेटल ग्राइंडर को निकाला। सुबह करीब 10 बजे से शुरू हुई टेस्टिंग, लेकिन शाम 45 बजे से देर रात 1.8 मीटर की टेस्टिंग ही हो गई है।

खबरें और भी हैं…

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *