रक्षा अग्निवीरों पर संसदीय स्थायी समिति के लाभ | रक्षा मामलों की संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट: कहा- शहीद अग्निवीरों के परिजनों को भी मिले नियमित सैनिकों के शहीद पर मिलने वाले लाभ

नई दिल्ली21 मिनट पहले

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रक्षा मामलों की संसदीय समिति ने एक रिपोर्ट पेश की है। समिति ने रक्षा मंत्रालय से आग्रह किया है कि ड्यूटी के दौरान शहीद होने वाले अग्निवीरों के परिवारों को भी वही लाभ दिया जाए जो नियमित सैन्य स्मारक के शहीद होने वाले लोगों को उनके परिवारों से मिले।

समिति ने कहा है कि शहीद होने वाले अग्निवीरों के परिजनों को पेंशन के तहत ड्यूटी के दौरान नियमित लाभ नहीं मिलता है। अग्निवीरों के परिवार की स्थिति को देखते हुए प्रार्थना में बदलाव किया गया।

समिति ने कहा है कि कर्तव्य के दौरान मरने वाले सैनिकों के परिवारों को दी जाने वाली ग्रेस राशि को हर श्रेणी में 10 लाख रुपये तक शामिल किया जाए।

रक्षा मंत्रालय की एक समिति ने बताया है कि सेना के जवानों को किस स्थिति में शहीद किया गया है।

  • ड्यूटी पर होने वाली दुर्घटनाओं, क्रेटेशियंस, असामाजिक तत्वों द्वारा की जाने वाली हिंसा में कोई भी सैनिक शहीद होता है तो 25 लाख रुपये का नुकसान होता है।
  • सीमा पर होने वाले नेताओं, उग्रवादी-कट्टरपंथियों से लेकर कम्युनिस्ट पार्टी, समुद्री डाकुओं आदि के खिलाफ कार्रवाई में 35 लाख रुपये के आतंकियों को शहीद किया जाता है।
  • युद्ध के दौरान दुश्मनों की कार्रवाई में किसी सैनिक की शहादत होती है तो बिजनेस में 45 लाख रुपये की राशि दी जाती है।

वैज्ञानिक राशि में 10 लाख रुपए का विभाजन हो
समिति ने रक्षा मंत्रालय से कहा है कि सरकार को सभी शेयरों में शहीद हुए जवानों की सैलरी पर 10 लाख रुपये तक की बढ़ोतरी पर विचार करना चाहिए। किसी भी श्रेणी के तहत न्यूनतम कम्युनिस्ट राशि 35 लाख रुपये और मास्टरमाध्यम जनजाति 55 लाख रुपये होनी चाहिए।

अग्निपथ योजना क्या है और क्यों शुरू हुई?

  • सरकार ने 2022 में अग्निपथ योजना शुरू की। इसके तहत आर्मी, नेवी और एयर फोर्स में चार साल के लिए जवानों को ट्रेनिंग पर भर्ती किया जाता है। चार साल में छह महीने की ट्रेनिंग भी शामिल है। चार साल बाद सोलो को उनकी विश्वसनीयता के आधार पर रेटिंग दी जाएगी। इसी योग्यता के आधार पर 25% अग्निवीरों को स्थायी सेवा में लिया जाएगा। बाकी लोग वापस सिविल दुनिया में आ जायेंगे।
  • इस स्केल में रैंक के नीचे के सैनिकों की भर्ती होगी। यानी भिन्न श्रेणी पर्सनल बिलो ऑफिसर रैंक यानी पीबीओआर के तौर पर पर होगी। इन सैनिकों की रैंक सेना में अभी होने वाली कमीशंड ऑफ़र और नॉन-कमिशंड ऑफ़र की नियुक्ति से अलग होगी। साल में दो बार रैली के जरिए भर्ती की जाएगी। अग्निवीर बनने के लिए 17.5 साल से 21 साल का होना जरूरी है। साथ ही कम से कम 10वीं पास करना जरूरी है। 10वीं पास भर्ती होने वाले अग्निवीरों को 4 साल की सेवा पूरी करने के बाद 12वीं के समकक्ष सेमेस्टर दिया जाएगा।
  • वर्तमान में मेडिकल में हर कैडर की इस योजना के तहत भर्ती की जा रही है। उदाहरण के लिए आर्मी, नेवी, स्टोर्स आदि स्थानों पर भी स्थापित किया जा सकता है। अग्निवीरों की सेवा कभी भी समाप्त हो सकती है। चार साल पहले सेवा नहीं छोड़ी जा सकती, लेकिन विशेष मामलों में अक्षम अधिकारी की अनुमति से ऐसा संभव है।
  • सरकार का कहना है कि इस योजना से सिविल सोसायटी के प्रतिभाशाली युवाओं को रोजगार मिलेगा और सेवारत सैनिकों की औसत आयु कम हो जाएगी। सरकार का ये भी तर्क है कि नई पीढ़ी के आने से हमारी फोर्सेज टेक्नोलॉजी रूप से समृद्ध और हमारी सुरक्षा बल आधुनिक होगी। जब इस अग्निवीर की चार साल बाद सेवा समाप्त हो गई तो सामाजिक जीवन में चले जाएंगे तो समाज को एक अनुशासनात्मक और ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
  • हालाँकि, कुछ विद्वानों का मानना ​​है कि सरकार ने यह योजना साल दर साल पेंशन पेंशन राशि को कम करने के लिए शुरू की है। नई स्थायी भारतीयों के लिए हर साल सरकार पर पेंशन का बोझ बढ़ रहा था।

स्थाई जवान और अग्निवीर की मुलाकात वाली से दोस्ती में फर्क हुआ

  • दोनों में सबसे बड़ा अंतर पेंशन का है। नियुक्ति के बाद स्थायी सैनिकों को हर महीने सेना की ओर से पेंशन मिलती है। वहीं चार साल तक सेवा देने के बाद अग्निवीर को कुछ नहीं मिला। हां इतना जरूर होगा कि 25% अग्निवीर सेना में स्थायी नौकरी के लिए क्वाली शहीद हो जाएंगे, जिसमें बाद में सारे बेनिटिट मिलेंगे।
  • युद्ध में हताहत होने की स्थिति में, एक नियमित सैनिक के परिवार को मुक्त पारिवारिक पेंशन मिलती है, जो ताउम्र मिलने वाली नौकरी के बराबर होती है। इस अमाउंट पर कोई इनकम टैक्स नहीं लगता है। जबकि अग्निवीर के परिवार के लिए केवल 48 लाख रुपये की गैर-अंशद बीमा राशि का पात्र है। स्थायी सैनिकों को अंतिम सेवा के लिए 15 दिन की ग्रेच्युटी डेट और 50 लाख का बीमा होता है।
  • यदि कोई स्थायी सैनिक ऑपरेशन के दौरान विकलांग हो जाता है तो उसके ग्रेजुएशन लेवल तक के बच्चों को शिक्षा दी जाती है। अग्निवीरों को ऐसा कोई बेनिट नहीं मिलता। सेना में एक सैनिक के वेतनमान 40 हजार रुपये प्रतिमाह होते हैं, जबकि अग्निवीरों को 30 हजार रुपये प्रतिमाह दिये जाते हैं।
  • यदि अग्निवीर कर्तव्य के दौरान विकलांगता होती है तो उसे विकलांगता के स्तर के आधार पर राशि का भुगतान होता है और चार साल में विकलांगता के स्तर के आधार पर विकलांगता का भुगतान होता है। वहीं स्थायी सैनिकों को पात्रता के आधार पर पेंशन और कई तरह के लाभ मिलते हैं।
  • सेना के वफादारों या अवशेषों के लिए राक्षस महानिदेशालय (डीजीआर) में कई स्मारक हैं। उनमें पेट्रोल पंप का विशेष विवरण होता है। शहीद के हॉस्टल को एलपीजी गैस एजेंसी लेने पर भी छूट है, लेकिन अग्निवीरों को ऐसी किसी योजना का लाभ नहीं मिला। पूरी खबर पढ़ें…

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